bhojpuri kavita Archive

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उनकी हर बात में कुछ बात होला

उनकी हर बात में कुछ बात होला ऊ चुप भी रहेली त कुछ बात होला   जब भी कुछ लोग में ऊ मिल जाली त कुछ कहेली ना आँखिन से बात होला   जब आग  लागी  त  धुँआ उठबे करी केहू

उनका छूअला से पोर पोर बिजुरिया समा गइल हो

उनका छूअला से पोर पोर बिजुरिया समा गइल हो हो गइल तीरथ सगरो देहिया गंगा नहा गइल हो   ऊ रहे संगे त हँसावत रहे गुदगुदावत रहे हरदिन जब बिछुड़ल त आँखिन से लोरवा बहा गइल हो   चिरई खांेतवा से

सब  मीठी – मीठी  बतिया सबके अच्छा लागे

सब  मीठी – मीठी  बतिया सबके अच्छा लागे तू  ओतने  बोलऽ जेतना  सबके  अच्छा लागे   हम जानत बानी  नवका  युग आइल बा बाकी तन  ओतने  खोलऽ जेतना सबके  अच्छा लागे   आधुनिक  पहिनावा  से  ना हमके कुछु बैर बा पर 

केहू  के प्यार में मूअला  से जियल  ठीक बा

केहू  के प्यार में मूअला  से जियल  ठीक बा अब त  हर  हाल में तनहा ही रहल ठीक बा   जिनिगी  के सफर  में घाव  जे गहिरा लागल जग  में नुमाइश कइला  से  सियल ठीक बा   एक  बेर  के ठोकर 
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